क्रिया की व्युत्पत्ति होती है-
क्रिया के मूल रुप (मूलांश) को धातु कहते हैं। धातु से ही क्रिया पद का निर्माण होता है, इसीलिए क्रिया के सभी रुपों में ‘धातु’ उपस्थित रहती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि क्रिया की व्युत्पत्ति धातु से होती है।
अन्य विकल्प सम्बन्धित हैं-
संज्ञा – किसी जाति, द्रव्य, गुण, भाव, स्थान आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं।
सर्वनाम – संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द को सर्वनाम कहते हैं।
विशेषण – संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं।
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निम्न में प्रेरणार्थक क्रिया है-
“अब पढ़कर क्या होगा” इस वाक्य में कौन-सी क्रिया है?
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भरे भौन मैं करत हैं, नैनन ही सो बात”
उपर्युक्त दोहे में प्रयुक्त मुख्य क्रियापदों की संख्या है-
अधोलिखित किस वाक्य में अकर्मक क्रिया है?
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