पूर्वी जम्पारण जिले के केसरिया नामक गांव में विश्व का सबसे विशाल बौद्ध स्तूप मिला है। केसरिया नामक स्थान की खोज अलेक्जेंडर कनिंघम ने किस चीनी यात्री के चित्रों एवं यात्रा वर्णनों में हुए उल्लेख के आधार पर किया था?
पूर्वी चम्पारण जिले के केसरिया नामक गांव में विश्व का सबसे विशाल बौद्ध स्तूप मिला है। केसरिया नामक स्थान की खोज अलेक्जेंडर कनिंघम ने चीनी यात्री ह्नेनसांग के चित्रों एवं यात्रा वर्णनों में हुए उल्लेख के आधार पर किया था। कुछ वर्ष पूर्व मोहम्मद के.के. द्वारा शुरु की गई खुदाई में पूर्वी चम्पारण जिला के केसरिया गांव में एक विशाल बौद्ध स्तूप मिला था। इस स्तूप की ऊँचाई 104 फीट है जो जावा स्थित विश्व धरोहर स्मारक बोरोबदूर स्तूप की तुलना में एक फीट अधिक है। 7 सितम्बर, 2001 को हुई भारी वर्षा में इस स्तूप के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए तथा इसका क्षरण अभी भी जारी है। 7वीं सदी के चीनी यात्री ह्वेनसांग के चित्रों एवं यात्रा वर्णनों में हुए उल्लेख के आधार पर अलेक्जेंडर कनिंघम ने केसरिया नामक स्थान की खोज की थी, लेकिन ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ ने खुदाई के बाद बौद्ध स्तूप के विशाल आकार-प्रकार होने की अधिकारिक रुप से पुष्टि की है। इस खुदाई में ‘महापरिनिर्वाण सुत्त’ सबसे महत्वपूर्ण अभिलेख मिला है। इस अभिलेख में केसरिया को ‘भोगनगर’ कहा गया है तथा महात्मा बुद्ध के राजगीर से कुशीनगर की यात्रा एवं 80 वर्ष की उनकी अवस्था का जिक्र है। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार वैशाली से कुशीनगर जाने के क्रम में तथागत बुद्ध ने वैशाली वासियों को रोकने के लिए केसरिया में उन्हें भिक्षापात्र स्मृति चिन्ह के रुप में भेंट किया था। इसी घटना की याद में सम्राट अशोक ने केसरिया में बौद्ध स्तूप का निर्माण कराया था।
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