Sponsored Advertisement
इंडियन गवर्नमेंट एग्जाम प्रेप

यदि नील की खेती करने से छूट चाहते, तो नील के किसानों को कौन-सी क्षतिपूर्ती कर देना पड़ता था?

A बट्टा
B जजिया
C तवान
D नज़राना
Correct Answer: C
Solution & Explanation

ब्रिटिश प्रशासन और जमींदारों ने "तीन कठिया" प्रणाली की स्थापना की थी जिसके अंतर्गत एक बीघा में तीन कट्ठा भूमि नील की खेती के लिए आरक्षित थी। किसानों को नील की खेती की लागत उठानी पड़ी और ब्रिटिश खेतमालिक किसानों की क्षतिपूर्ति किए बिना ही उपज रख लेते थे। इतना ही नहीं, उन पर लगाए गए विभिन्न करों के माध्यम से उनका भी शोषण किया गया। मारवा और सगोरा जैसे कारखानों में नील देने के दौरान किसानों को कई करों का भुगतान करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इन किसानों से 'तवान' नामक क्षतिपूर्ति कर देना होता था।

Advertisement

संबंधित प्रश्न (Related)

‘चामरग्राही यक्षिणी’ की मूर्ति जो पटना संग्रहालय में सुरक्षित है, किस स्थान से प्राप्त हुई थी?

कालाशोक किसका उत्तराधिकारी था ?

बिहार राज्य में मानसून कब लौटता है?

बिहार में आर्द्र पतझड़ वन किस भाग में पाये जाते हैं?

जनगणना 2011 के अनुसार बिहार के सबसे कम लिंगानुपात वाले जिले का सही क्रम (बढ़ते क्रम में) है?