बनारस एवं इलाहाबाद में तीर्थयात्रा कर की समाप्ति के लिए किसने बादशाह के सामने बनारस के पंडितों का नेतृत्व किया था?
कवींद्राचार्य शाहजहाँ के आश्रित कवि थे, इनकी भाषा में ब्रज एवं अवधी का अनुपम समन्वय है। 'कवींद्र कल्पलता' उन्होंने शाहजहाँ की प्रशस्ति में प्रणीत की थी। 'सरस्वती' उपाधि धारक यह विद्वान संस्कृत का मर्मज्ञ था, इन्होंने बादशाह से निवेदन कर तीर्थ यात्रा कर समाप्त करवा दिया था, जिसके निमित्त अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए नैयामिक महाम होपाध्याय विश्वनाथ न्याय पंचानन सहित एक सौ विद्वानों ने इन्हें संग्रह समर्पित किया था।
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