खड़ीबोली को प्रधानता देने में सर्वाधिक योगदान रहा-
खड़ी बोली को प्रधानता देने में सर्वाधिक योगनान आर्य समाज का रहा है। क्योंकि आर्य समाज ने हिन्दी पत्रकारिता के उन्नयन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
आर्य समाज - स्वामी दयानन्द सरस्वती, (1875)
ब्रह्म समाज – राजा राममोहन राय, (1828)
प्रार्थना समाज – आत्माराम पांडुरंग, (1867)
थियोसोफिकल सोसाइटी – मैडम ब्लावात्सकी और कर्नल अल्कॉट, (1875)
संबंधित प्रश्न (Related)
सुमेलित कीजिए :
| भाषा | अन्य नाम |
| (a) ब्रजभाषा | 1. बाँगरु |
| (b) अवधी | 2. खल्टाही |
| (c) हरियाणवी | 3. अन्तर्वेदी |
| (d) छत्तीसगढ़ी | 4. बैसवाड़ी |
कूट : (a) (b) (c) (d)
‘अंकित मूल्य’ पारिभाषिक शब्द किस क्षेत्र में बोला जाता है?
तुलसीदास की रचना 'रामचरितमानस' किस बोली की साहित्यिक रचना है?
बोली का क्षेत्र जब थोड़ा विकसित हो जाता है, और उसमें साहित्य की रचना होने पर क्या बन जाती है?
इन बोलियों को उनके बोली क्षेत्र से सुमेलित कीजिये-
(a) ब्रजभाषा - 1. छपरा
(b) भोजपुरी - 2. सुल्तानपुर
(c) मैथिली - 3. बरेली
(d) अवधी - 4. अलीगढ़
- 5. दरभंगा
कूट : (a) (b) (c) (d)