किस शासक ने स्वयं को 'लिच्छवी दोहित्र' कहा है ?
समुद्रगुप्त ने स्वयं को लिच्छवी दौहित्र कहा है। समुद्रगुप्त लिच्छवी राजकुमारी कुमार देवी से उत्पन्न हुआ था। समुद्रगुप्त के इतिहास को जानने का प्रमुख स्रोत उसका प्रयाग प्रशस्ति लेख है। इसी में उसे लिच्छवी दौहित्र कहा गया है और इस प्रशस्ति की रचना उसके सन्धि विग्रह हरिषेण ने की थी। समुद्र गुप्त के छः प्रकार के स्वर्ण सिक्के गरुड़ प्रकार, धनुर्धारी प्रकार, परशु प्रकार, अश्वमेघ प्रकार, व्याघ्रहनन प्रकार, वीणा वादन से इसके काल के इतिहास को जाना जाता है।
संबंधित प्रश्न (Related)
बिहार में उग्रवाद की घटनाओं में निरंतर वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
‘छऊ’ बिहार का प्रमुख है-
भोजपुर के उज्जैनी शासक निम्न में से कौन नहीं थे?
गया के कांग्रेस अधिवेशन में सबसे प्रमुख प्रश्न क्या था?
मध्यकालीन बिहार से संबंधित इन स्रोतों को सही सुमेलित करें।
| रचना | रचनाकार |
| A. रियाज-उस्सलातीन | 1. गुलाम हुसैन सलीम |
| B. तारीखे शेरशाही | 2. अब्बास सर्वानी |
| C. वाकियाते मुश्ताकी | 3. रिज्कुलाह |
| D. अफसनाएँ जहाँ | 4. शेख कबीर |
कूटः A B C D