जैन साहित्य के प्रमुख रचनाकारों में इनका प्रमुख स्थान है?
जैन धर्म की दो शाखाएँ हैं- दिगम्बर और श्वेताम्बर। पुष्पदन्त प्रसिद्ध जैन साहित्यकार थे, जिनका समय दसवीं सदी को माना जाता है। पुष्पदन्त ने चार प्रसिद्ध ग्रन्थों की रचना की, जिनमें-
(1) तिसट्ठि महापुरिस गुणालंकार,
(2) ठाय कुमार चरिउ
(3) जसहर चरिउ
(4) कोश ग्रन्थ
इत्यादि हैं।
संबंधित प्रश्न (Related)
निम्न कथनों पर विचार कीजिए।
(1) कम्पनी ने हरियाणा को दो भागों में बाँट दिया, जिनमें प्रथम भाग का नियन्त्रण सीधे कम्पनी के हाथ में था।
(2) यह क्षेत्र दिल्ली के 60 किमी. उत्तर तथा 60 किमी. दक्षिण में फैला था।
(3) इस क्षेत्र में समालखा, टपुकड़ा, नूँह और हथिन को शामिल नहीं किया गया था
(4) इस क्षेत्र पर सीधे गवर्नर जनरल दखल देता था
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सत्य है?
किस ग्रन्थ के अनुसार प्रभाकरवर्द्धन की मुत्यु होने पर रानी यशोमती राजा की चिता में स्वयं को समर्पित कर सती हो गई?
मध्यकाल में ‘उत्तरी संगीत’ की परम्परा फली-फूली, जिसके अंतर्गत किस विद्या का वजूद कायम हुआ?
ब्रिटिश सरकार द्वारा ‘शम्सुल-उलेमा’ की उपाधि किसे दी गई थी?
असहयोग आंदोलन के दौरान हरियाणा में किसने राय बहादूर का पद छोड़ा?