हरियाणा में सूफी परम्परा की शुरुआत कब से मानी जाती है।
हरियाणा में सूफी परम्परा की नींव 1244 ई. में शेख फरीद के आकर रहने से पड़ा। इनका पूरा नाम शेख-उल-इस्लाम मौलाना दीवान बाबा फरीद-उद्दीन गंज-ए-शंकर सुलेमान अणोधनी था। ये ख्वाजा उलुबुद्दीन बख्तियार काकी के शिष्य थे। इन्होंने हरियाणा में चिश्ती सम्प्रदाय की स्थापना की थी।
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निम्न कथनों पर विचार कीजिए।
(1) कम्पनी ने हरियाणा को दो भागों में बाँट दिया, जिनमें प्रथम भाग का नियन्त्रण सीधे कम्पनी के हाथ में था।
(2) यह क्षेत्र दिल्ली के 60 किमी. उत्तर तथा 60 किमी. दक्षिण में फैला था।
(3) इस क्षेत्र में समालखा, टपुकड़ा, नूँह और हथिन को शामिल नहीं किया गया था
(4) इस क्षेत्र पर सीधे गवर्नर जनरल दखल देता था
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सत्य है?
सुमेलित कीजिए
| सूची-। | सूची-।। |
| A. पण्डित शंकर लाल | (i) जयमल पत्ता |
| B. अहमद बख्श | (ii) भूरा-बादल |
| C. हरदेव | (iii) कृष्ण-जन्म |
| D. माँगेराम | (iv) हीर-राँझा |
कूटः A B C D
हरियाणा राज्य लघु उद्योग और निर्यात निगम की स्थापना की गई थी-
1809 ई. में बुंगेल सिंह की मुत्यु के बाद छछरौली रियासत पर जोधसिंह ने अधिकार कर लिया। जोधसिंह किस रियासत का शासक था?
सांग परम्परा की शुरुआत कब हुई?