शेरशाह की प्रशासनिक प्रयोगशाला किसे कहते हैं?
शेरशाह की प्रशासनिक प्रयोगशाला सासाराम (सहसराम) को कहते हैं। रोहतास जिले में स्थित सासाराम के नगर को विशिष्ट महत्व शेरशाह के कारण रहा है। इसी क्षेत्र में, जो उसके पिता हसन खाँ सूर की जागीर में शामिल था, शेरशाह का आरंभिक जीवन बीता। यहीं उसने अपने लगान-संबंधी सुधारों का प्रारुप तैयार किया। इस नगर का मुख्य आकर्षण शेरशाह का मकबरा है जो अफगान स्थापत्य शैली का भारत में सर्वश्रेण्ठ उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस प्रकार बिहार फरीद खाँ (शेरशाह) के लिए एक सहसराम (सासाराम) प्रशासनिक प्रयोगशाला।
शेरशाह एक व्यवस्था सुधारक के रुप में जाना जाता है, व्यवस्था प्रवर्तक के रुप में नहीं। साम्राज्य निर्माता एवं प्रशासक के रुप में उसे अकबर का पूर्वगामी माना जाता है. शेरशाह ने सल्तनतकालीन व्यवस्था के आधार पर निम्नांकित विभागों की व्यवस्था की थी-
दीवाने-वजारत- यह लगान और अर्थव्यवस्था का प्रधान था।
दीवाने-आरिज- ये सेना के संगठन, भर्ती, रसद शिक्षा और नियंत्रण की देखभाल करता है।
दीवाने-रसालत- यह विदेस मंत्री की भाँति कार्य करता था।
दीवाने-ईशा- पत्राचार विभाग
दीवाने-काजी- न्याय संबंधी कार्य
दीवाने-बरीद- गुप्तचर विभाग
शेरशाह ने इन सभी व्यवस्य़ाओं का संचालन सासाराम से प्रारंभ किया। इसलिए सासाराम को शेरशाह का प्रशासनिक प्रयोगशाला कहा जाता है।
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