‘सामा-चकेवा’ बिहार राज्य का प्रचलित है-
प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह मे शुल्क पक्ष की सप्तमी से पूर्णमासी तक अभिनीत सामा-चकेवा लोक-नाट्य में पात्र तो मिट्टी द्वारा निर्मित होते हैं किन्तु उनका अभिनय बालिकाओं द्वारा किया जाता है। इस अभिनय में सामा अर्थात् श्यामा तथा चकेवा की भूमिका निभाई जाती है। सामूहिक गाए जाने वाले गीतों में प्रश्नोत्तर के माध्यम से विषयवस्तु प्रस्तुत की जाती है।
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