“मैं नगर को ध्वस्त कर रहा हूँ एवं महल तथा मुख्य भवनों को उड़ा देने की तैयारी कर रहा हूँ, आज मैंने कुँवर सिंह द्वारा हाल ही में बड़ी धन राशि खर्च करके बनवाए गए मंदिर को अंशतः तोड़वा दिया है" यह उक्ति किसकी है?
यह कथन विसेन्ट आयर का है। 2 अगस्त, 1857 ई. को कुँवर सिंह एवं, मेजर आयर की सेनाओं के बीच बीबीगंज के निकट भयंकर संघर्ष हुआ, जिसमें कुँवर सिंह के नेतृत्व में विद्रोहियों को आरा छोड़ना पड़ा। अंग्रेजों ने आरा शहर के सभी नागरिकों को शस्त्रहीन कर दिया एवं कुछ भारतीय सैनिकों को मृत्युदंड भी दिया गया। जगदीशपुर में कुंवर सिंह के महल को अंग्रेजों ने ध्वस्त कर दिया और इन लोगों ने पास के मन्दिर को भी नहीं छोड़ा। सभी विद्रोहियों की सम्पत्ति भी जब्त कर ली गई।
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