मगध के परवर्ती गुप्त शासकों का सही क्रम है-
मगध के परवर्ती गुप्त शासकों का सही क्रम है-कृष्णगुप्त-हर्ष गुप्त जीवित गुप्त-कुमारगुप्त-दामोदरगुप्त- महासेन गुप्त देवगुप्त-माधवगुप्त- आदित्य सेन, जीवित गुप्त को राजाओं का सिरमौर कहा जाता था। कुमार गुप्त को 'वीरों में अग्रण्य' कहा गया। आदित्य सेन ने 'परम भट्टारक महाराजाधिराज' की उपाधि धारण की। उसने तीन अश्वमेघ यज्ञ भी किये इसका उल्लेख मंदरलेख में हुआ है। इसके शासन काल में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने यात्रा की थी।
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मगध के परवर्ती गुप्त शासक और उसके उपाधियों को सुमेलित कीजिए-
| शासक | उपाधि |
| (A) हर्षगुप्त | 1. परमभट्टारक महाराजाधिराज |
| (B) कुमारगुप्त | 2. वीर योद्धा |
| (C) जीवितगुप्त | 3. राजाओं में शिरमौर (क्षितीशचूड़ामणि |
| (D) आदित्य सेन | 4. महाराजाधिराज |
कूट: A B C D
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