Question :
A) नेत्र का शीघ्र ही स्थिति अनुरुप समंजित नहीं कर पाना
B) क्षण भर के लिए दृष्टि पटल का असंवेदनशील हो जाना
C) परितारिका (iris) द्वारा पुतली को तुरंत ने फैला पाना
D) लेंस व दृष्टि-पटल के अन्तराल को समंजित होने में देरी
Answer : C
जब कोई व्यक्ति बाहर तेज प्रकाश से एक अंधेरे कमरे में प्रवेश करता है तो कुछ देर तक वह स्पष्ट देख पाने में समर्थ नहीं होता। इसका कारण है -
A) नेत्र का शीघ्र ही स्थिति अनुरुप समंजित नहीं कर पाना
B) क्षण भर के लिए दृष्टि पटल का असंवेदनशील हो जाना
C) परितारिका (iris) द्वारा पुतली को तुरंत ने फैला पाना
D) लेंस व दृष्टि-पटल के अन्तराल को समंजित होने में देरी
Answer : C
Description :
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धागे के एक सिरे पर बंधे पत्थर के टुकड़े को, धागे के दूसरे सिरे को हाथ में पकड़कर, वृत्ताकर घुमाया जाता है। अगर धागे की लम्बाई व टुकड़े के वेग दोनों को दो गुना करने पर धागे का तनाव पहले की अपेक्षा –
A) दो गुना हो जाएगा
B) चार गुना हो जाएगा
C) आधा रह जाएगा
D) अपरिवर्तित रहेगा
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नेत्र का समायोजन -
A) नेत्र की पुतली के माप में परिवर्तन से होता है
B) परितारिका के संकुचन से होता है
C) रोमाक पेशियों (ciliary muscle) के द्वारा होता है
D) दृष्टि-पटल की अग्रगामी गति से होता है
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विद्युत् उपकरण को भूसंपर्कित किया जाता है जिससे -
A) किसी खराबी से उपकरण को बचाया जा सके
B) बिजली का झटका न लगे
C) बिजली की खपत कम हो
D) लघुपथन न हो
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दो प्रोटॉनों (धन आवेशित कर्णों) के मध्य बल -
A) सदैव प्रतिकर्षण बल होता है
B) सदैव आकर्षण बल होता है
C) इनमें मध्य अन्तराल अनुसार आकर्षण या प्रतिकर्षण बल होता है
D) सदैव शून्य बल होता है
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अन्तरिक्ष यान के उच्च परिक्रमा कक्ष से निम्न कक्ष में आने पर उसका वेग -
A) अपरिवर्तनीय रहता है
B) कम हो जाता है
C) बढ़ जाता है
D) अपूर्वानुमेय रुप से परिवर्तित हो जाता है