Question :

‘द्वार-द्वार भटकना’ में प्रयुक्त द्विरुक्ति ‘द्वार-द्वार’ है-


A) पारस्परिक सम्बन्ध बताने के अर्थ में
B) अतिशयता प्रकट करने के अर्थ में
C) भेद बताने के अर्थ में
D) समग्रता प्रकट करने के अर्थ में

Answer : D

Description :


‘द्वार-द्वार’ संज्ञा शब्द की द्विरुक्ति है। द्विरुक्ति का अर्थ है- दुहराना अर्थात् एक उक्ति को दो बार उच्चरित करना। इसकी रचना सार्थक शब्दों की आवृत्ति से होती है। प्रस्तुत वाक्य में ‘द्वार-द्वार’ द्विरुक्ति का प्रयोग ‘समग्रता प्रकट करने के अर्थ में’ हुआ है।


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कौन-सा शब्द भाववाचक संज्ञा नहीं है?


A) मिठाई
B) चतुराई
C) लड़ाई
D) उतराई

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इनमें से भाववाचक संज्ञा है-


A) तप
B) तीर
C) भरत
D) चिन्ता

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‘सच्चरित्रता’ किस मूल शब्द से बना है?


A) सतचरित्र
B) चरित्र
C) चरित्रता
D) सच्चरित्र

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निम्न में संज्ञा शब्द है-


A) गंगा
B) पुराना
C) नीला
D) मोटा

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‘द्वार-द्वार भटकना’ में प्रयुक्त द्विरुक्ति ‘द्वार-द्वार’ है-


A) पारस्परिक सम्बन्ध बताने के अर्थ में
B) अतिशयता प्रकट करने के अर्थ में
C) भेद बताने के अर्थ में
D) समग्रता प्रकट करने के अर्थ में

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