‘तरंग’ का पर्यायवाची है -
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‘एक मनई के दूइ बेटवे रहिन। ओह मॉ लहुरा अपने बाप से कहिस-दादा धन मॉ जवन हमर बखरा लागत होय तवन हमका दै द।‘ यह अवतरण हिन्दी की किस बोली में है ?
निर्देश :- नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न में वाक्य के पहले और अंतिम भागों को क्रमश: 1 और 6 की संख्या दी गयी है | इनके बीच में आने वाले अंशो को चार भागों में बाँटकर य, र, ल, व, की संख्या दी गयी है | ये चारों भाग उचित क्रम में नहीं हैं इन्हें ध्यान से पढ़कर दिए गए विकल्पों में से उचित क्रम चुनिए जिससे वाक्य का निर्माण हो |
(1) सामाजिक जीवन में
(य) क्रोध की जरुरत बराबर पड़ती है
(र) मनुष्य दुसरों के द्वारा पहुँचाए जाने वाले बहुत से
(ल) यदि क्रोध न हो तो
(व) कष्टों की चिर निवृति का
(6) उपाय ही न कर सके।
‘इक’ उपसर्ग के प्रयेग से बना शब्द है -
निर्देश :- नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न में वाक्य के पहले और अंतिम भागों को क्रमश: 1 और 6 की संख्या दी गयी है | इनके बीच में आने वाले अंशो को चार भागों में बाँटकर य, र, ल, व, की संख्या दी गयी है | ये चारों भाग उचित क्रम में नहीं हैं इन्हें ध्यान से पढ़कर दिए गए विकल्पों में से उचित क्रम चुनिए जिससे वाक्य का निर्माण हो |
(1) गृहिणी गृहस्थ जीवनरुपी नौका की वह पतवार है
(य) इस नौका को
(र) बचाती हुई
(ल) थपेड़ों और भंवरों से
(व) जो अपनी बुद्धिबल, चरित्रबल और त्यागमय जीवन से
(6) किनारे तक पहुँचाती है।
‘सामान्य’ का विलोम शब्द है -