सूर्य से ऊर्जा उत्सर्जित होती है-
नाभिकीय संलयन से सूर्य से ऊर्जा उत्सर्जित होती है।
जब दो हल्के नाभिक आपस में जुड़कर एक भारी नाभिक बनाता है तो इस अभिक्रिया में ऊर्जा मुक्त होती है जो नाभिकीय संलयन कहलाता है।
सूर्य में हाइड्रोजन के नाभिक आपस में जुड़कर हीलियम के नाभिक में पारिर्वतित होते हैं तथा बड़े पैमाने पर ऊर्जा मुक्त होती है।
बड़े नाभिक टूटकर जब दो हल्के नाभिक में परिर्वतित होते हैं, जिसके फलस्वरुप बड़े पैमाने पर ऊर्जा मुक्त होती है ऐसी क्रिया को नाभिकीय विखण्डन कहते है। नाभिकीय विखण्डन की क्रिया मंद गति वाले न्यूट्रॉन से करायी जाती है।
संबंधित प्रश्न (Related)
आम जीवाण्वीय मरहम पट्टी में काम आने वाला पीला ठोस पदार्थ है-
निम्नांकित में से कौन-सी गैस का आवरण, सूर्य से हानिकारक पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित कर लेता है?
किसी तत्व का परमाणु भार 35 है तथा 18 इलेक्ट्रॉन है, तो उस तत्व में प्रोटॉनों की संख्या होगी-
किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान का 273 परम ताप पर आयतन 25 मिलीᵒ है। यदि दाब स्थिर रखा जाए, तो 546 परम ताप पर उसी गैस के द्रव्यमान का आयतन होगा-
चिमनी से निकलने वाले धुएँ में उपस्थित राख की मात्रा को कम करते हैं-