‘उच्चारण’ शब्द में उपसर्ग है-
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रहिमन जो गति दीप की, कुल कपूत गति सोय ।
बारे उजियारै लगै, बढ़ै अंधेरो होय ।।
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?
कुम्हार अपना ही घड़ा सराहता है का अर्थ है -
‘उन्मीलन’ का विलोम शब्द है -
निर्देश :- नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न में वाक्य के पहले और अंतिम भागों को क्रमश: 1 और 6 की संख्या दी गयी है | इनके बीच में आने वाले अंशो को चार भागों में बाँटकर य, र, ल, व, की संख्या दी गयी है | ये चारों भाग उचित क्रम में नहीं हैं इन्हें ध्यान से पढ़कर दिए गए विकल्पों में से उचित क्रम चुनिए जिससे वाक्य का निर्माण हो |
(1) वैसे देखा जाए तो
(य) प्रकृति स्वयं उस शक्ति का निर्माण करती है, जो
(र) नाना प्रकार के दाहक और पाचक रसों के रुप में
(ल) उदर के भीतर कोई अग्नि की ज्वाला नहीं है, किन्तु
(व) नाना भाँति के खाद्य पदार्थो अर्थात् भोज्य को
(6) पचा सकती है।
‘देवर’ शब्द का तत्सम है -