अति मलीन वृषभानुकुमारी।
अधोमुख रहति, उरध नहिं चितवत, ज्यों गथ हारे थकित जुआरी।
छूटे चिहुर बदन कुम्हिलानों, ज्यों नलिनी हिमकर की मारी।।
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?
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इस समास में पहला पद संख्यावाचक होता है -
हम जो कुछ देख रहे हैं, सुन्दर है सत्य नहीं है।
यह दृश्य जगत भासित है, बिन कर्म शिवत्व नहीं है।।
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा छंद है ?
निर्देश :- नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न में वाक्य के पहले और अंतिम भागों को क्रमश: 1 और 6 की संख्या दी गयी है | इनके बीच में आने वाले अंशो को चार भागों में बाँटकर य, र, ल, व, की संख्या दी गयी है | ये चारों भाग उचित क्रम में नहीं हैं इन्हें ध्यान से पढ़कर दिए गए विकल्पों में से उचित क्रम चुनिए जिससे वाक्य का निर्माण हो |
(1) धनिया ने नाक सिकोड़कर कहा
(य) उसका नाम सुनकर
(र) मैंने तुमसे सौ बार
(ल) मेरे मुँह पर भाइयों का बखान न किया करो
(व) हजार बार कह दिया कि
(6) मेरे देह में आग लग जाती है।
कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली का अर्थ है -
‘लौकिक’ शब्द में प्रत्यय है