बिहार में गंगा के मैदानी भाग की मिट्टियाँ किस प्रकार की है?
बिहार की मिट्टियों को निर्माण प्रक्रिया की दृष्टि से दो कोटियों में रखा जा सकता है। (1) अवशिष्ट मिट्टी (2) प्रवाही या अपोढ़ मिट्टी अवशिष्ट मिट्टी का निर्माण चट्टानों से हुआ है। अपोढ़ मिट्टियाँ, निर्मायिका चट्टानों से मिलकर प्रवाहित होकर अलग स्थान पर निक्षेपित हो जाती है। गंगा के वृहत मैदान की मिट्टियों के निर्माण में लौह अयस्क, कैल्साइट, अभ्रक, फैल्सपार और डोलामाइट जैसे खनिज तत्वों की प्रधानता रहती है। बिहार का विशाल मैदान उत्तरी पर्वतीय प्रदेश और दक्षिणी पठारी प्रदेश के बीच फैला है। इन मैदानों का निर्माण द्वारा लायी गई जलोढ़ मिट्टी से हुआ है, तथा इसका उत्तरवर्ती भाग काप के जमाव से निर्मित है। पश्चिम सीमावर्ती क्षेत्र में चूने कंकड़ के जमान पाए जाते है। दक्षिण गंगा का मैदान की मिट्टी महीन है क्योंकि दक्षिणी मैदान की नदियाँ कंकड़, पत्थर को तोड़ नहीं पाती और महीन कण को ही अपने साथ बहा कर ले जा पाती है।
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