उत्तर प्रदेश में किसी नगर का मेयर-
1. नगर का प्रथम नागरिक होता है
2. नगर निगम का पदेन सदस्य होता है
3. कार्यकारिणी समिति का पदेन सभापति होता है
4. कार्यपालक मशीनरी का पूर्ण नियंत्रण करता है
नगर का प्रथम नागरिक मेयर, राज्य का प्रथम नागरिक राज्यपाल तथा देश का प्रथम नागरिक राष्ट्रपति होता है। उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 71(1) के अनुसार महापौर नगर निगम का पदेन सदस्य होगा। अधिनियम की धारा 151(1) के अनुसार कार्यकारिणी समिति (क) महापौर जो पदेन कार्यकारिणी समिति का सभापति होगा तथा (ख) ऐसे 12 व्यक्तियों को जो (निगम) द्वारा पार्षदों में से चुने जाएंगे, से मिलकर बनेगी। अधिनियम की धारा 175(5) के अनुसार-महापौर के सामान्य नियंत्रण और निर्देश के तथा जहाँ कहीं भी इसमें आगे स्पष्टतः ऐसा निर्देश किया गया हो, यथा स्थिति निगम या कार्यकारिणी समिति की स्वीकृति के अधीन रहते हुए तथा इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन रहते हुए इस अधिनियम को कार्यान्वित करने के प्रयोजनार्थ कार्यपालिका के अधिकार नगर आयुक्त में निहित होंगे। जो उन समस्त कर्तव्यों का पालन तथा उन समस्त अधिकारों का प्रयोग भी करेगा जो विशिष्ट रुप से उस पर आरोपित किए गए हों या उसे दिए गए हों।
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