‘एक मनई के दूइ बेटवे रहिन। ओह मॉ लहुरा अपने बाप से कहिस-दादा धन मॉ जवन हमर बखरा लागत होय तवन हमका दै द।‘ यह अवतरण हिन्दी की किस बोली में है ?
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तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए में कौन-सा अलंकार है ?
‘इक’ उपसर्ग के प्रयेग से बना शब्द है -
अति मलीन वृषभानुकुमारी।
अधोमुख रहति, उरध नहिं चितवत, ज्यों गथ हारे थकित जुआरी।
छूटे चिहुर बदन कुम्हिलानों, ज्यों नलिनी हिमकर की मारी।।
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?
निर्देश :- नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न में वाक्य के पहले और अंतिम भागों को क्रमश: 1 और 6 की संख्या दी गयी है | इनके बीच में आने वाले अंशो को चार भागों में बाँटकर य, र, ल, व, की संख्या दी गयी है | ये चारों भाग उचित क्रम में नहीं हैं इन्हें ध्यान से पढ़कर दिए गए विकल्पों में से उचित क्रम चुनिए जिससे वाक्य का निर्माण हो |
(1) वैसे देखा जाए तो
(य) प्रकृति स्वयं उस शक्ति का निर्माण करती है, जो
(र) नाना प्रकार के दाहक और पाचक रसों के रुप में
(ल) उदर के भीतर कोई अग्नि की ज्वाला नहीं है, किन्तु
(व) नाना भाँति के खाद्य पदार्थो अर्थात् भोज्य को
(6) पचा सकती है।
हिन्दी किस भाषा-परिवार की भाषा है ?