अखिल भारतीय चरखा संघ का उद्घाटन किसने किया था?
अखिल भारतीय चरखा संघ का उद्घाटन गांधीजी ने किया था। महात्मा गांधी ने खादी के संबंध में कहा है कि खादी एक वस्त्र मात्र नहीं थ अपितु वह एक विचार था जिसके पालन से इस देश को आजादी हासिल हो सकती थी। उन्होंने खादी एवं चरखा को भारत की हर समस्या का समाधान बताया। उन्होंने लिखा कि यदि भारत को अपने खोए गौरव को फिर से हासिल करना है तो उसे चरखा को अपनाना होगा। 1915 तक उन्होंने चरखा को नहीं देखा था। 1919 ई. में पहली बार कांग्रेस ने अपने अमृतसर अधिवेशन में खादी से संबंधित प्रस्ताव पारित किया। इसमें कहा गया कि 'हाथ कताई और हाथ बुनाई' द्वारा निर्मित कपड़ा ही पूर्ण स्वदेशी है। 1920 के नागपुर सम्मेलन में खादी को अपनाने पर जोर दिया गया। देशबंधु चित्तरंजन दास पटना आए और लोगों का आह्वान करते हुए उन्हें स्वदेशी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए चरखा चलाने को प्रेरित किया। 1922 में कांग्रेस के अंदर एक खादी विभाग का गठन हुआ जिसने जमना लाल बजाज के निर्देशन में काम शुरू हुआ। इसी वर्ष काकीनाड़ा में अखिल भारतीय खादी मंडल की स्थापना की गई। जमुना लाल बजाज इसके अध्यक्ष नियुक्त किये गए। 6 फरवरी, 1921 ई. को गांधी जी ने पटना के लोगों से कहा कि सिर्फ खादी एवं चरखा से ही देश को स्वराज की प्राप्ति हो सकेगी। 19 अप्रैल, 1947 ई. को अखिल भारतीय चरखा संघ ने लक्ष्मी नारायण के आग्रह को स्वीकार कर लिया और गाँधी ने बिहार चरखा संघ का नामकरण बिहार खादी समिति के नाम से किया।
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