चन्द्रगुप्त मौर्य के राज प्रासाद के बारे में किसने कहा है कि "यह प्रासाद मानव कृति नहीं है वरन् देवों द्वारा निर्मित है।"
चन्द्रगुप्त मौर्य के राजप्रसाद के बारे में फाहियान ने कहा है कि "यह प्रसाद मानव कृत्रिम नहीं है वरन देवों द्वारा निर्मित है।" फाहियान चीनी यात्री था और चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में बौद्ध स्थान देखने के उद्देश्य से भारत आया था। उसने पवित्र बौद्ध स्थलों संकिसा , श्रावस्ती, राजगृह, बोधगया, सारनाथ, कपिलवस्तु, वैशाली आदि की यात्रा की। उसने श्रावस्ती का जेतवन विहार तथा पाटलिपुत्र में मौर्य के राजमहल की प्रशंसा की।
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